Supreme Court Death Of Officer In Kasauli Due To Non-implementation Of Laws Its A Unfortunate Death - कसौली मर्डर: हिमाचल सरकार को Sc की फटकार,कहा- महिला अधिकारी की मौत दुर्भाग्यपूर्ण

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सोलन के कसौली में अवैध निर्माण हटाने पहुंची टीसीपी महिला अधिकारी की हत्या के बाद प्रदेश सरकार और प्रशासन की कार्यशैली कटघरे में है। सुप्रीम कोर्ट ने भी प्रदेश सरकार को जमकर फटकार लगाई है। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान तो लिया ही है साथ ही कहा है कि महिला अधिकारी की मौत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि महिला की मौत का मतलब है कि प्रदेश में कानून का पालन ठीक से नहीं हो रहा है और लोगों में कानून को लेकर कोई डर नहीं है। 

 कोर्ट ने सरकार को जमकर लताड़ा है। शीर्ष अदालत ने पूछा है कि घटनास्थल पर कार्रवाई के दौरान अधिकारियों को पूरी सुरक्षा क्यों नहीं मुहैया कराई गई। यही नहीं शीर्ष अदालत ने प्रदेश सरकार को यह आदेश दिया है कि जांच के दौरान इस बात की भी पुष्टि की जाए कि पूरे राज्य में कहीं भी अवैध निर्माण नहीं हो। शीर्ष अदालत में जस्टिस मदन बी लोकुर और दीपक गुप्ता की बेंच ने प्रदेश सरकार को यह भी निर्देश दिया है कि वह इस बात की भी पुष्टि करें की कसौली में अवैध निर्माण वाले 13 होटलों पर वह क्या कार्रवाई कर रही है।

जस्टिस लोकुर की पीठ ने आज यह भी कहा कि महिला अधिकारी की मौत कोर्ट के ऑर्डर की वजह से नहीं बल्कि कानून का ठीक से पालन नहीं होने की वजह से हुई है। उन्होंने कहा कि महिला की मौत बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने राज्य के रिप्रजेंट कर रहे वकील को यह भी कहा कि राज्य सरकार इस बात की भी ताकीद करे कि राज्य में अवैध निर्माण को लेकर क्या कार्रवाई की जा रही है उसकी भी पूरी सूचना दें। इस मामले की अगली सुनवाई 9 मई को होगी। 

मंगलवार को कसौली में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक अवैध निर्माण हटाने का काम चल रहा है। इस दौरान एक अवैध गेस्ट हाउस को तोड़ने के लिए टीसीपी अधिकारी शैल बाला के साथ एक टीम पहुंची हुई थी। इस दौरान गेस्ट-हाउस मालिक विजय ठाकुर से उनकी बहस हुई। विजय ने अधिकारियों के काम में बाधा डालने की कोशिश की। इसके बाद उसने अवैध निर्माण हटाने की गई टीम पर अंधाधुध फायरिंग कर दी। इस वारदात में टीसीपी अधिकारी शैल बाला की मौत हो गई, जबकि एक पीडब्ल्यूडी अधिकारी घायल हो गया। दरअसल, पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने 15 दिनों के भीतर अवैध निर्माण को हटाने का नोटिस भेजा था। 
 
कसौली के कुछ होटल और रिसॉर्ट को ढहाने की कार्रवाई करने पहुंची महिला सरकारी अधिकारी शैलबाला शर्मा और उनकी टीम नारायणी के गेस्ट हाउस पर मंगलवार की सुबह 11.30 बजे पहुंची थी। उनकी चार सदस्यों वाली टीम सरकारी गेस्ट हाउस से निकलकर कसौली के अवैध निर्माण को हटाने के लिए गए थे।

 सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि कसौली के होटलों और मकानों में हुए अवैध निर्माण को ढहा दिया जाए। इस कार्रवाई के तीन घंटे बाद शैल की मृत्यु हो गई। उनका कथित तौर पर नारायणी गेस्ट हाउस के मालिक विजय ठाकुर ने पीछा किया और फिर गोली मार दी। ठाकुर ने शर्मा की टीम के सदस्य गुलाब सिंह को भी घायल कर दिया था।

गोली लगने से पहले मंगलवार की सुबह शर्मा ने कोर्ट के आदेश वाले कागजात दिखाए थे। इन कागजों में उन सभी अवैध निर्माण की जानकारी थी जिन्हें कि गिराया जाना था। उनकी टीम के एक सदस्य ने घोषणा करते हुए कहा था कि नारायणी और उसके बगल वाले शिवालिक होटल को खाली कर दिया जाए ताकि अवैध निर्माण को हटाने वाली टीम अपना काम कर सके। ठाकुर और शिवालिक होटल के मालिक वेद गर्ग घोषणा के बाद बाहर आए। शर्मा ने बहुत ही आराम से उन्हें बताया कि वह केवल कोर्ट के आदेश का पालन कर रही हैं। दोनों उनके साथ अवैध निर्माण को ढहाने को लेकर बहस करने लगे।

शर्मा ने ठाकुर और उनकी मां नारायणी (इन्हीं के नाम पर गेस्ट हाउस का नाम रखा गया है) से कहा- खाली करवा दो सामान। ठाकुर ने कहा कि उनके पास इमारत का पास हुआ नक्शा है। मगर शर्मा अपनी बात दोहराती रहीं कि हम केवल कोर्ट के आदेशों का पालन कर रहे हैं। ठाकुर इस दौरान लगातार हाथ जोड़कर शर्मा से अपने गेस्ट हाउस को ना ढहाने की अपील करता रहा। जिसपर उन्होंने कहा कि आपने कोर्ट की डेडलाइन के अंदर अवैध निर्माण को क्यों नहीं हटाया।

आप कोर्ट में अपील दायर कीजिए। हमारा समय बर्बाद मत कीजिए। ऐसा है ना सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर हैं मेरे पास, यह मेरे ऑर्डर नहीं हैं। हम आपसे कोई लड़ाई नहीं करना चाहते हैं केवल कोर्ट के आदेश का पालन कर रहे हैं। एसडीएम द्वारा समझाने के बाद ठाकुर कुछ देर के लिए शांत हो गया। इसके बाद एसडीएम और टाउन प्लानर दूसरी साइट को देखने के लिए चले गए। दोपहर 1.45 बजे शर्मा ने लंच ब्रेक लिया। उनकी टीम डिप्पी पहुंची जो नारायणी गेस्ट हाउस से 500 मीटर की दूरी पर स्थित है।

2.30 बजे जैसे ही वह नारायणी गेस्ट हाउस वापस पहुंची, तभी ठाकुर ने उनपर गोली चला दी। गेस्ट हाउस के अंदर उस समय मौजूद पीडब्ल्यूडी कर्मचारी रौशन लाल ने बताया कि पहली गोली मैडम के सीने में लगी। इसके बाद उसने दूसरी गोली गुलाब सिंह को मारी। मैडम बाहर की तरफ भागी लेकिन ठाकुर ने उनका पीछा किया और दोबारा गोली मार दी। जिसके बाद वह नीचे गिर गईं।


सोलन के कसौली में अवैध निर्माण हटाने पहुंची टीसीपी महिला अधिकारी की हत्या के बाद प्रदेश सरकार और प्रशासन की कार्यशैली कटघरे में है। सुप्रीम कोर्ट ने भी प्रदेश सरकार को जमकर फटकार लगाई है। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान तो लिया ही है साथ ही कहा है कि महिला अधिकारी की मौत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि महिला की मौत का मतलब है कि प्रदेश में कानून का पालन ठीक से नहीं हो रहा है और लोगों में कानून को लेकर कोई डर नहीं है। 


 कोर्ट ने सरकार को जमकर लताड़ा है। शीर्ष अदालत ने पूछा है कि घटनास्थल पर कार्रवाई के दौरान अधिकारियों को पूरी सुरक्षा क्यों नहीं मुहैया कराई गई। यही नहीं शीर्ष अदालत ने प्रदेश सरकार को यह आदेश दिया है कि जांच के दौरान इस बात की भी पुष्टि की जाए कि पूरे राज्य में कहीं भी अवैध निर्माण नहीं हो। शीर्ष अदालत में जस्टिस मदन बी लोकुर और दीपक गुप्ता की बेंच ने प्रदेश सरकार को यह भी निर्देश दिया है कि वह इस बात की भी पुष्टि करें की कसौली में अवैध निर्माण वाले 13 होटलों पर वह क्या कार्रवाई कर रही है।

जस्टिस लोकुर की पीठ ने आज यह भी कहा कि महिला अधिकारी की मौत कोर्ट के ऑर्डर की वजह से नहीं बल्कि कानून का ठीक से पालन नहीं होने की वजह से हुई है। उन्होंने कहा कि महिला की मौत बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने राज्य के रिप्रजेंट कर रहे वकील को यह भी कहा कि राज्य सरकार इस बात की भी ताकीद करे कि राज्य में अवैध निर्माण को लेकर क्या कार्रवाई की जा रही है उसकी भी पूरी सूचना दें। इस मामले की अगली सुनवाई 9 मई को होगी। 

मंगलवार को कसौली में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक अवैध निर्माण हटाने का काम चल रहा है। इस दौरान एक अवैध गेस्ट हाउस को तोड़ने के लिए टीसीपी अधिकारी शैल बाला के साथ एक टीम पहुंची हुई थी। इस दौरान गेस्ट-हाउस मालिक विजय ठाकुर से उनकी बहस हुई। विजय ने अधिकारियों के काम में बाधा डालने की कोशिश की। इसके बाद उसने अवैध निर्माण हटाने की गई टीम पर अंधाधुध फायरिंग कर दी। इस वारदात में टीसीपी अधिकारी शैल बाला की मौत हो गई, जबकि एक पीडब्ल्यूडी अधिकारी घायल हो गया। दरअसल, पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने 15 दिनों के भीतर अवैध निर्माण को हटाने का नोटिस भेजा था। 
 





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महिला अधिकारी कहती रही वह कानून का पालन कर रही है







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